एक देश के चलते नह

एक देश के चलते नह

 एनएसजी में चीन के विरोध के चलते भारत का प्रवेश नहीं हो पाया था लेकिन अमेरिका का समर्थन भारत को लगातार मिल रहा था। अमेरिका की ओर से ये भी कहा गया था कि इस साल के अंत तक भारत के इस ग्रुप में शामिल होने की पूरी संभावना है। भारत के साथ ही अमेरिका भी उसे एनएसजी में शामिल कराने की पूरी कोशिशें कर रहा है। वहीं इस मामले में रोड़ा बनकर उभरे चीन को अमेरिका ने साफ संदेश दिया है। अमेरिका का कहना है कि ग्रुप का सिर्फ एक मेंबर अंतर्राष्ट्रीय सहमति को कैसे रोक सकता है, उस मेंबर को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अमेरिका के राजनीतिक मामलों के उपमंत्री टॉम शैनन ने कहा कि अमेरिका एनएसजी में भारत का प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिका के इस शीर्ष राजनयिक ने कहा कि हम समझते हैं कि एनएसजी सहमति से ही फैसले लेता है और एक मेंबर ही इसमें रुकावट भी पैदा कर सकता है। लेकिन ऐसा करने वाले को जवाबदेह जरूर ठहराया जाना चाहिए। उसे अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका और इंडिया दोनों को ही आगे कैसे बढ़ना है, ये सोचने की जरूरत है। हम साथ बैठेंगे और सोचेंगे कि सिओल में क्या हुआ, डिप्लोमैटिक प्रॉसेस पर बारीकी से गौर करेंगे। हम यह तय करेंगे अगली बार हम सफल रहें। भारत को एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता का वाहक बताते हुए अमेरिका के राजनीतिक मामलों के उपमंत्री टॉम शैनन ने यह भी कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन जो कर रहा है वह पागलपन है और वह चाहता है कि हिंद महासागर में नई दिल्ली बड़ी भूमिका निभाए। परमाणु अप्रसार के क्षेत्र में भारत को विश्वसनीय और महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए शैनन ने कहा, हम इस बात पर प्रतिबद्ध हैं कि भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल हो। हमारा मानना है कि हमने जिस तरह का काम किया है, नागरिक परमाणु समझौता, भारत ने जिस तरीके से खुद को नियंत्रण किया है, वह इसका हकदार है। एनएसजी में भारत के प्रवेश संबंधी प्रयास पर उन्होंने कहा कि भारत को इस समूह में शामिल किया जाए, इसके लिए अमेरिका लगातार काम करता रहेगा। शैनन ने विदेश सचिव एस. जयशंकर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हाल में भारत को मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) में शामिल करना दर्शाता है कि वह परमाणु अप्रसार के मार्ग पर जिम्मेदार और महत्वपूर्ण देश है। उन्होंने कहा, हमें दुख है कि सियोल में हम और भारत एनएसजी में भारत को प्रवेश दिलाने में सफल नहीं हो सके।